एन आई एन,
पिथौरागढ़। सदर रामलीला के नवम दिवस सेतु बंधन, अंगद-रावण संवाद, लक्ष्मण शक्ति, सुषेण वैद्य, संजीवनी बूटी और भरत तपस्या की लीलाओं का प्रभावशाली मंचन किया गया। इन प्रसंगों में भक्ति, वीरता, त्याग और भ्रातृप्रेम के भाव देखने को मिले। लीला की शुरुआत समुद्र पर सेतु निर्माण के प्रसंग से हुई। इसके बाद राम-रावण युद्ध के दौरान मेघनाद की शक्ति लगने से लक्ष्मण मूर्छित हो जाते हैं। लक्ष्मण की स्थिति देखकर श्रीराम व्याकुल हो उठते हैं। सुषेण वैद्य उन्हें बचाने के लिए संजीवनी बूटी लाने की सलाह देते हैं। इसके बाद हनुमान जी संजीवनी बूटी की खोज में प्रस्थान करते हैं और औषधि की पहचान न कर पाने पर पूरा पर्वत ही उठा लाते हैं।
भरत की तपस्या और श्रीराम के प्रति उनके अटूट प्रेम का प्रसंग भी प्रस्तुत किया गया। लक्ष्मण की मूर्छा से व्याकुल श्रीराम और उनके अनुज के प्रति प्रेम ने वातावरण को भावुक कर दिया। संजीवनी बूटी के प्रभाव से लक्ष्मण की चेतना लौटने के प्रसंग के साथ रामलीला मैदान में उपस्थित दर्शकों ने इस मार्मिक लीला का आनंद लिया।